तेजी से बढ़ते बुढ़ापे के रोग का सामना करने वाले सैम बर्न्स आखिरकार मौत
से हार गए। वे महज 17 साल के थे। दुर्लभ जेनेटिक स्थिति के कारण उनकी यह
हालत हुई थी। इस रोग का कोई इलाज न देख सैम के माता-पिता ने इसके लिए एक
शोध केंद्र ही खोल दिया था। इसके माध्यम से वे लोगों को जागरूक भी कर रहे
हैं।
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